"श्री कृष्ण परमात्मा थे "
कितनी प्रतिकूलताओं से भरा है उनका जीवन -"जन्म से पाहिले जिसके सात भाई मारे जा चुके हो ,जिनके माता पिता बंदीघर में हो, बंदीघर में ही जिसका जन्म हुआ हो,जिन्हें अपने बाल्सहयोगी और प्रियजनों का वियौग सहेना पड़ा हो, जिनका बचपन दैत्यों की हमलों की मारो में बीता हो जिसे महाभारत जैसे सर्वनाशी युद्ध का सञ्चालन करना पड़ा हो जिसकी आँखों के सामने उसके पुत्र पौत्र कट मरे हो, जिनकी मृतु के समय एक भी स्वजन सहयौगी पास न हो उस व्यक्ति के जीवन से अधिक प्रतिकूलता किसे जीवन में हो सकती है ? फिर भी वह रसमय थे ,स्थित प्रज्ञा थे सुख दुःख में एक जैसे थे गीता उन्ही के अनुभवों का सार है
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